खामनेई की मृत्यु के पीछे डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल द्वारा किया गया एक बहुत बड़ा संयुक्त सैन्य हमला (Joint Military Strike) है।
ताज़ा रिपोर्ट्स (1 मार्च 2026) के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ईरान की राजधानी तेहरान में स्थित खामनेई के आधिकारिक परिसर (Compound) पर भीषण बमबारी की। इस हमले में खामनेई की मृत्यु हो गई, जिसकी पुष्टि खुद डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर की और बाद में ईरान के सरकारी मीडिया ने भी इसे स्वीकार कर लिया है।
यह “अहंकार और शक्ति” का प्रदर्शन है। एक तरफ खामनेई जैसे नेता थे जिन्होंने झुकने से इनकार किया, और दूसरी तरफ ट्रम्प हैं जो अपनी शर्तों पर दुनिया को चलाना चाहते हैं। इस टकराव में सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता का हो रहा है।
ट्रम्प द्वारा इस कदम को उठाने के मुख्य कारण और स्थितियाँ निम्नलिखित हैं:
1. परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल खतरा
ट्रम्प का तर्क है कि ईरान अपने परमाणु हथियार बनाने के बहुत करीब पहुँच गया था और उसकी मिसाइलें यूरोप व अमेरिका के ठिकानों के लिए खतरा बन रही थीं। ट्रम्प ने इसे “दुनिया की शांति के लिए जरूरी कदम” बताया है।
2. “हत्या की साजिश” का आरोप
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने दावा किया था कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने डोनाल्ड ट्रम्प की हत्या की साजिश रची थी। ट्रम्प ने इस हमले को उसी का “जवाब” और “न्याय” करार दिया है।
3. ‘सत्ता परिवर्तन’ (Regime Change) का लक्ष्य
ट्रम्प ने स्पष्ट कहा है कि खामनेई की मृत्यु ईरानी जनता के लिए अपनी किस्मत खुद लिखने का “सबसे बड़ा अवसर” है। वे चाहते हैं कि वहां की वर्तमान धार्मिक सत्ता खत्म हो और एक नई व्यवस्था बने।
4. इजरायल के साथ सीधा युद्ध
जून 2025 से ही इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर था। ट्रम्प ने सत्ता में आते ही इजरायल को पूरी छूट दी और इस “सर्जिकल स्ट्राइक” को अंजाम दिया, जिसमें खामनेई के साथ उनके परिवार के कुछ सदस्य और कई शीर्ष सैन्य कमांडर भी मारे गए हैं।
खामनेई के जाने के बाद की स्थिति:
- 40 दिन का शोक: ईरान में 40 दिनों के शोक की घोषणा की गई है।
- अस्थिरता: अब सवाल यह है कि क्या वहां गृहयुद्ध होगा या उनके बेटे मुजतबा खामनेई सत्ता संभालेंगे?
जो डरा होता है वही दूसरे को डराता है
डोनाल्ड ट्रम्प ने सत्ता में वापस आते ही अपनी ‘मैक्सिमम प्रेशर’ (Maximum Pressure) की नीति को और भी आक्रामक बना दिया है। जनवरी 2026 में वेनेजुएला पर किया गया सैन्य हमला और अब ईरान के खिलाफ उनकी कार्रवाई, दोनों एक ही कड़ी का हिस्सा हैं।
वेनेजुएला पर हमले के पीछे ट्रम्प के मुख्य उद्देश्य ये थे:
1. निकोलस मादुरो को हटाना (Regime Change)
ट्रम्प ने 3 जनवरी 2026 को ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ (Operation Absolute Resolve) के तहत वेनेजुएला की राजधानी काराकास पर हमला करवाया। इस ऑपरेशन का मुख्य मकसद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाकर उन्हें गिरफ्तार करना था। ट्रम्प का मानना था कि मादुरो एक “अवैध तानाशाह” हैं जिन्होंने अपने देश को बर्बाद कर दिया है।
2. ड्रग तस्करी (Narco-Trafficking) का आरोप
ट्रम्प ने हमले को जायज ठहराते हुए कहा कि मादुरो शासन अमेरिका में नशीले पदार्थों (Drugs) की तस्करी का मुख्य केंद्र बन गया था। उन्होंने इसे अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम बताया।
3. तेल संसाधनों पर नियंत्रण
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल (Oil) का भंडार है। हमले के बाद ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे अमेरिकी तेल कंपनियों को वहां भेजेंगे ताकि वहां के खराब पड़े बुनियादी ढांचे को ठीक किया जा सके और मुनाफ़ा कमाया जा सके।
4. चीन और रूस का प्रभाव कम करना
वेनेजुएला में चीन और रूस का काफी निवेश और प्रभाव था। इस हमले के जरिए ट्रम्प ने दुनिया को यह संदेश दिया कि पश्चिमी गोलार्ध (Western Hemisphere) में अमेरिका का वर्चस्व बना रहेगा और किसी बाहरी ताकत का दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
खामियाजा और वर्तमान स्थिति:
- वेनेजुएला: मादुरो को गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क ले जाया गया है, जहाँ उन पर मुकदमा चल रहा है। वहां अब एक अस्थायी सरकार बनाने की कोशिश हो रही है।
- ईरान: खामनेई की मौत के बाद पूरा मध्य पूर्व अब युद्ध की आग में है।