प्राचीन काल में हमारे ऋषि-मुनि कायाकल्प का प्रयोग करते थे। जिससे उनका उम्र काफी बढ़ जाता था और वे हष्ट-पुष्ट, तरो-ताजा महशूस करते थे।। आज विज्ञानं ने एक टेलोमेरेस एंजाइम की खोज की है। जो हमारी ढलती उम्र के लिए जिम्मेदार है। विज्ञान ने तो अभी खोज की है, लेकिन हमारे ऋषि-मुनि कायाकल्प की विद्या को पहले से जानते थे। टेलोमेरेस क्या हैं? हमारे शरीर के भीतर अरबों कोशिकाएं (Cells) होती हैं। हर कोशिका के केंद्र में डीएनए (DNA) के धागे होते हैं, जिन्हें क्रोमोसोम (Chromosomes) कहा जाता है। टेलोमेरेस एंजाइम इन क्रोमोसोम के सिरों पर स्थित एक सुरक्षा कवच (Protective Cap) की तरह होते हैं। जैसे-जैसे कोशिकाएं विभाजित होती हैं, ये टेलोमेरेस छोटे होते जाते हैं, जिससे हम तेजी से बुढ़ापे की ओर बढ़ते जाते हैं। अगर इन टेलोमेरेस को छोटा होने से रोक दिया जाए या वापस लंबा कर दिया जाए, तो उम्र बढ़ाई जा सकती है।
उदाहरण: जिस तरह जूतों के फीतों के आखिरी सिरों पर प्लास्टिक की छोटी टोपी (Aglet) होती है, जो फीते को खुलने या बिखरने से बचाती है, ठीक वही काम टेलोमेरेस हमारे डीएनए के लिए करते हैं।
जिससे टेलोमेरेस की लम्बाई बढ़ जाती थी और वे लम्बा जीवन जीते थे। विज्ञान अभी इसे ‘टेलोमेरेज एंजाइम’ (Telomerase Enzyme) का नाम दिया है। प्राचीन ऋषि इसे बढ़ाने के लिए ‘कायाकल्प’ का प्रयोग करते थे ।
1. टेलोमेरेस और बुढ़ापे का संबंध
तनाव (Stress): कोर्टिसोल (Cortisol) नामक हार्मोन हमारे डीएनए के टेलोमेरेस को कैंची की तरह काटता है।
मृत भोजन: डिब्बाबंद और रसायनों से भरा भोजन शरीर की ऊर्जा को मरम्मत के बजाय पाचन में बर्बाद कर देता है।
नींद की कमी: गहरी नींद के दौरान ही शरीर की मरम्मत करने वाले ‘मिस्त्री’ जागते हैं।
2. टेलोमेरेस (Telomerase): बुढ़ापे का इलाज
विज्ञान ने इस विशेष एंजाइम की खोज की है जिसे ‘टेलोमेरेज’ कहते हैं। इसे प्राचीन भारत में ‘सोम रस’ के समान माना गया है।यह एंजाइम छोटे हो चुके टेलोमेरेस को फिर से लंबा करने की क्षमता रखता है। यदि इस एंजाइम को सक्रिय (Activate) कर दिया जाए, तो कोशिकाएं फिर से जवान हो सकती हैं।
3. टेलोमेरेस को लंबा रखने के उपाय उपवास (Autophagy):
16 घंटे का उपवास करने से शरीर पुरानी और खराब कोशिकाओं को खत्म कर नई कोशिकाओं के निर्माण में ऊर्जा लगाता है।
गहरी सांस (Deep Breathing): धीमी और लंबी सांस लेने से ‘ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस’ कम होता है, जिससे टेलोमेरेस सुरक्षित रहते हैं।
ध्यान और हंसी: ध्यान करने से कोर्टिसोल का स्तर गिरता है और हंसी शरीर की इम्युनिटी बढ़ाती है, जिससे डीएनए रिपेयर की गति तेज होती है। एपिजेनेटिक्स (Epigenetics): यह विज्ञान बताता है कि आपके सकारात्मक विचार आपके डीएनए की संरचना और टेलोमेरेस की लंबाई को प्रभावित कर सकते हैं।
4. कायाकल्प की 3 महा-औषधियां (समाधान):
लंघन (उपवास/Autophagy): 16 घंटे का उपवास करने से शरीर अपने भीतर के कचरे और पुरानी कोशिकाओं को खाना शुरू कर देता है, जिससे नई कोशिकाओं का निर्माण होता है।
प्राण और श्वास: कछुए की तरह गहरी और धीमी सांस लेने से ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम होता है और उम्र बढ़ती है।
प्रकृति का रसायन: अश्वगंधा, आंवला और गिलोय जैसी जड़ी-बूटियां सीधे मस्तिष्क को शांत करती हैं और टेलोमेरेस की रक्षा करती हैं।
निष्कर्ष: टेलोमेरेस हमारे शरीर की ‘जैविक घड़ी’ (Biological Clock) हैं। हम अपनी आदतों को बदलकर इस घड़ी की सुइयों को धीमा कर सकते हैं और लंबी आयु प्राप्त कर सकते हैं।
साभार : ओशो ऑडियो रिकॉर्डिंग