आचार्य प्रशांत के विचारों में ‘शादी’ (विवाह) को किसी पारंपरिक या केवल सामाजिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि पूरी तरह से अध्यात्म, चेतना और मनोविज्ञान (Psychology) के नजरिए से देखा गया है। आचार्य…
हम अपना नाम, अपना काम, अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा, या अपने विचार तक सिमित हैं। अध्यात्म कहता है कि यह सब तो केवल बाहरी परत (Outer Shell) है। हमारा सचेत मन (Conscious Mind) हमारे…