“बहुत गुरूर था दरिया को अपने होने पर, जो प्यास बुझ गई तो याद आया कि कुछ भी नहीं।” इतिहास गवाह है कि बड़े-बड़े सम्राट और दिग्गज आए और चले गए, लेकिन दुनिया का कारवां कभी नहीं रुका। पेड़ से पत्ता गिरता है तो पेड़ मर नहीं जाता, नए पत्ते आ जाते हैं। कब्रिस्तान ऐसे लोगों से भरा पड़ा है जिन्हें लगता था कि उनके बिना दुनिया नहीं चलेगी । “अहं” (अहंकार) जब किसी व्यक्ति पर सवार होता है, तो उसे लगने लगता है कि वह अनिवार्य (indispensable) है। सबकुछ वही कर रहा है ।
यहाँ इस विषय का विस्तार से विश्लेषण किया गया है:
‘अहं’ का भ्रम और ब्रह्मांड का सत्य
इंसान को लगता है कि वह “अनिवार्य” (indispensable) है। वह सोचता है कि अगर वह नहीं होगा, तो काम रुक जाएगा, परिवार बिखर जाएगा या व्यवस्था ठप हो जाएगी। लेकिन प्रकृति का नियम है कि किसी के होने या न होने से सृष्टि नहीं रुकती। कारवां चलता रहता है, बस मुसाफिर बदल जाते हैं। हम केवल एक माध्यम (medium) हैं। बच्चों का अपना भाग्य होता है और उनकी अपनी जीवन यात्रा। जिस ईश्वर ने उन्हें जन्म दिया है, वही उनके दाने-पानी का प्रबंध भी करता है। हम केवल निमित्त मात्र हैं
इंसान अक्सर यह भूल जाता है कि दुनिया एक विशाल मशीन की तरह है, जिसमें वह महज एक छोटा सा पुर्जा है। जब कोई संगठन, परिवार या प्रोजेक्ट सफल होता है, तो ‘अहं’ उसे यह विश्वास दिलाता है कि “अगर मैं न होता, तो यह सब बिखर जाता।” यह सोच व्यक्ति को वास्तविकता से दूर ले जाती है।
अहंकार हमेशा नियंत्रण (Control) चाहता है। उसे लगता है कि अगर वह नहीं होगा, तो परिवार, व्यापार या दुनिया रुक जाएगी।
- सच्चाई: जिस तरह रेलगाड़ी के चलने के लिए यात्री का भार उठाना जरूरी नहीं है (गाड़ी इंजन की शक्ति से चलती है), वैसे ही यह सृष्टि ईश्वरीय ऊर्जा (Cosmic Energy) से चल रही है। हम केवल उस ऊर्जा के माध्यम से काम करने वाले माध्यम हैं।
चेतना (Consciousness) का स्तर
जब हमारी चेतना शरीर और बुद्धि तक सीमित होती है, तो हमें ‘बोझ’ महसूस होता है।
- निम्न चेतना: “मैं सब कुछ कर रहा हूँ।” (तनाव, थकान और चिंता का कारण)
- उच्च चेतना: “परम शक्ति मेरे माध्यम से काम कर रही है।” (शांति, शक्ति और कुशलता का कारण)
अहं के ‘बहम’ से बाहर निकलने के लाभ
जब आप इस बोझ को उतार देते हैं कि “सब मुझे ही संभालना है,” तो आप पहले से बेहतर काम करने लगते हैं:
- थकान कम होती है: क्योंकि अब आप अपनी व्यक्तिगत ऊर्जा नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जा का उपयोग करते हैं।
- रिश्ते सुधरते हैं: क्योंकि आप दूसरों से ‘क्रेडिट’ की उम्मीद करना छोड़ देते हैं।
- निर्णय बेहतर होते हैं: क्योंकि आपका मन शांत और स्पष्ट (Clear) होता है।
निष्कर्ष : वक्त की रेत पर हम सब सिर्फ एक कदम के निशान हैं, अगली लहर आते ही निशान मिट जाते हैं और समंदर फिर भी वही रहता है।