Skip to content

Digital Desk

तकनीक और तरक्की का संगम

Menu
  • Home
  • Govt Schemes
  • Gyan-Vigyan
  • Health
  • Dharma
  • Make Money
    • Get Fund
    • Stock Market
  • Technology
  • Entertainment
  • About us
    • About
    • Contact us
    • Disclaimer
    • Disclaimer
Menu
Asht Siddhiya

प्राचीन काल में लोग मायावी शक्तियां कैसे प्राप्त करते थे ?

Posted on March 22, 2026

पौराणिक ग्रंथों और प्राचीन भारतीय दर्शन के अनुसार, ‘मायावी शक्ति’ का अर्थ ऐसी अलौकिक क्षमता से है जो प्रकृति के सामान्य नियमों से परे हो। प्राचीन काल में इसे प्राप्त करने के मुख्य रूप से तीन मार्ग बताए गए हैं:

अष्टसिद्धि क्या हैं? मायावी शक्तियां प्राप्त करने के 3 प्राचीन मार्ग और महत्व

1. तपस्या

यह सबसे प्रचलित मार्ग रहा है। असुरों (जैसे रावण, हिरण्यकश्यप) और ऋषियों ने हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या करके देवताओं को प्रसन्न किया और उनसे विशिष्ट वरदान प्राप्त किए।

एकाग्रता: इंद्रियों को वश में करके मन को एक बिंदु पर केंद्रित करना।
संकल्प शक्ति: अपनी इच्छाशक्ति को इतना प्रबल करना कि वह भौतिक जगत में परिवर्तन ला सके।

2. योग और सिद्धियां (Yogic Powers)

महर्षि पतंजलि के ‘योग सूत्र’ में ‘विभूति पाद’ के अंतर्गत ८ मुख्य सिद्धियों (अष्टसिद्धि) का वर्णन है। ये अभ्यास और साधना से प्राप्त होती हैं:

अणिमा: स्वयं को अणु के समान छोटा कर लेना।
महिमा: शरीर को अत्यंत विशाल बना लेना।
लघिमा: शरीर को भारहीन (हवा जैसा हल्का) कर लेना।
प्राप्ति: कहीं भी पहुंचने या अदृश्य वस्तुओं को प्राप्त करने की शक्ति।

3. तंत्र और मंत्र साधना (Tantric Practices)

मायावी शक्तियों का एक बड़ा हिस्सा विशिष्ट ‘ध्वनि विज्ञान’ यानी मंत्रों पर आधारित है।
ध्वनि की आवृत्ति: माना जाता है कि मंत्रों का सही उच्चारण ब्रह्मांड की ऊर्जा के साथ सामंजस्य बिठाता है।
यज्ञ और अनुष्ठान: विशिष्ट ऊर्जा को जागृत करने के लिए किए जाने वाले अनुष्ठान।

आधुनिक परिप्रेक्ष्य (Modern View)

आज के समय में जिसे हम ‘मायावी’ कहते हैं, उसे प्राचीन काल में ‘विज्ञान’ का ही एक गुप्त रूप माना जाता था। उदाहरण के लिए:

भ्रम पैदा करना (Illusion): प्रकाश और ध्वनि के हेरफेर से दृश्य बदलना।
पदार्थ का रूपांतरण: एक वस्तु को दूसरी वस्तु में बदलने की कला।

अष्टसिद्धि क्या हैं? मायावी शक्ति प्राप्त करने के प्राचीन मार्ग

महर्षि पतंजलि के योग सूत्र के अनुसार ‘अष्टसिद्धि’ (8 अलौकिक शक्तियों) का वर्णन मिलता है। हनुमान चालीसा में भी एक पंक्ति आती है— “अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, असबर दीन्हि जानकी माता”, जो इन्हीं शक्तियों की ओर संकेत करती है।

ये आठ सिद्धियां निम्नलिखित हैं:

  1. अणिमा (Anima)
    इसका अर्थ है शरीर को एक अणु (Atom) की तरह अत्यंत सूक्ष्म या छोटा बना लेना। इस शक्ति से साधक किसी भी छोटी से छोटी जगह या छेद से आर-पार जा सकता है और अदृश्य जैसा हो जाता है।
  2. महिमा (Mahima)
    यह अणिमा के विपरीत है। इसमें साधक अपने शरीर को अत्यंत विशाल बना सकता है। वह इतना बड़ा रूप धारण कर सकता है कि बादलों और पहाड़ों को भी छोटा दिखा दे।
  3. लघिमा (Laghima)
    इसका अर्थ है शरीर को हवा की तरह हल्का कर लेना। इस सिद्धि से व्यक्ति पानी पर चल सकता है या हवा में उड़ सकता है, क्योंकि शरीर का भार लगभग शून्य हो जाता है।
  4. गरिमा (Garima)
    यह लघिमा के विपरीत है। इसमें साधक अपने शरीर को अत्यंत भारी बना सकता है। इतना भारी कि दुनिया की कोई भी शक्ति उसे हिला तक न सके (जैसे अंगद ने रावण की सभा में अपना पैर जमाया था)।
  5. प्राप्ति (Prapti)
    इस सिद्धि का अर्थ है बिना किसी बाधा के कहीं भी पहुंच जाना। इससे साधक भविष्य की बातें जान सकता है, पक्षियों की भाषा समझ सकता है और छिपी हुई वस्तुओं को देख सकता है।
  6. प्राकाम्य (Prakamya)
    इसका अर्थ है इच्छाशक्ति की पूर्णता। साधक जो कुछ भी चाहे, वह उसे तुरंत प्राप्त हो जाता है। जैसे—पानी पर चलना, धरती के भीतर समा जाना या किसी दूसरे के मन की बात जान लेना।
  7. ईशित्व (Isitva)
    इसका अर्थ है ऐश्वर्य या स्वामित्व। साधक को प्रकृति और उसके तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) पर पूर्ण अधिकार प्राप्त हो जाता है। वह भगवान की तरह सृष्टि की वस्तुओं को नियंत्रित कर सकता है।
  8. वशित्व (Vasitva)
    यह वशीकरण की शक्ति है। इससे साधक किसी भी प्राणी (मनुष्य, पशु या प्रकृति) को अपने वश में कर सकता है। उसके सामने कोई भी विरोध नहीं कर पाता।
    ये सिद्धियां कैसे प्राप्त होती हैं?

योग शास्त्र के अनुसार, ये शक्तियां यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि के निरंतर अभ्यास से प्राप्त होती हैं। विशेष रूप से प्राणायाम (Breath Control) और एकाग्रता के गहरे स्तर पर पहुंचने के बाद ही साधक इन ‘विभूतियों’ का अनुभव करता है।

चेतावनी : प्राचीन ऋषियों ने चेतावनी दी है कि ये सिद्धियां आध्यात्मिक मार्ग में 'रुकावट' भी बन सकती हैं। अगर कोई साधक इनका प्रदर्शन करने लगे, तो उसका अहंकार बढ़ जाता है और वह अंतिम सत्य (मोक्ष) से भटक सकता है।

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • ऋषि-मुनि अपनी मानसिक शक्ति कैसे विकसित करते थे?
  • स्मार्ट वीडियो एडिटर ऐप
  • फ्री पीडीएफ एडिटर (Free PDF Editor)
  • AI Expense Notepad: अब अपने खर्चों का हिसाब रखना हुआ आसान!
  • Voice Dialer App: अब बोलकर करें फोन कॉल, डायल करने की झंझट खत्म!

Recent Comments

No comments to show.

Archives

  • November 2026
  • October 2026
  • September 2026
  • July 2026
  • June 2026
  • May 2026
  • April 2026
  • March 2026
  • February 2026
  • January 2026
  • December 2025

Categories

  • Gyan-Vigyan
  • Health
  • Religion
  • Govt. Scheme
  • Entertainment
  • Technology
  • Make Money
  • Healthwise Helpline
  • Stock Market
  • News

Source of Information: The information related to government schemes and services provided on this platform is sourced from official government portals like india.gov.in and nic.in.
Disclaimer: Digital Desks is an independent information portal and is NOT affiliated with any government entity or department.
​सूचना का स्रोत: इस प्लेटफॉर्म पर दी गई सरकारी योजनाओं और सेवाओं से संबंधित जानकारी आधिकारिक सरकारी पोर्टलों जैसे india.gov.in और nic.in से ली गई है।
अस्वीकरण: डिजिटल डेस्क एक स्वतंत्र सूचना पोर्टल है और यह किसी भी सरकारी इकाई या विभाग के साथ संबद्ध नहीं है।

©2026 Digital Desk | Design: Newspaperly WordPress Theme