स्वामी विवेकानंद का यह विचार उनके जीवन दर्शन का निचोड़ है। उन्होंने यह बात इसलिए कही थी क्योंकि वे जानते थे कि जानकारी (Information) इकट्ठा करना ‘शिक्षा’ नहीं है, बल्कि ‘मन को…
यह विरोधाभास ही सबसे बड़ा रहस्य है। हमारे पास एक ‘अलादीन का चिराग’ (अवचेतन मन) तो है, लेकिन हम उसे गलत तरीके से रगड़ रहे हैं। यह एक बहुत ही कड़वा लेकिन…
संसार में वैसे तो अनेक दुख हैं—बीमारी, गरीबी, अपमान—लेकिन मौत को सबसे बड़ा दुख इसलिए माना जाता है क्योंकि यह मनुष्य के सबसे बुनियादी डर और उसकी सबसे गहरी आसक्ति (Attachment) पर…
योग और अध्यात्म में ‘ऊर्ध्वगमन’ (Urdhvagaman) का अर्थ है ऊर्जा का नीचे से ऊपर की ओर प्रवाहित होना। सरल शब्दों में, यह हमारी चेतना और प्राण शक्ति (Vital Energy) को निम्न केंद्रों…
लगातार चिंता और भय बने रहने का सबसे बड़ा कारण अनिश्चितता और अति-चिंतन (Overthinking) है। आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से, डर हमेशा भविष्य में निवास करता है—हम उस चीज़ से डरते हैं…
हम बीमार क्यों पड़ते हैं? हमारी बीमारी का मुख्य कारण शरीर से टॉक्सिन्स का बाहर न निकल पाना है। हम रोज़ अपने घर में झाड़ू-पोंछा करते हैं, लेकिन शरीर में जमा होने…